दिव्य दरबार झलप : आस्था, दावे और जिम्मेदारी का सवाल

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिला के झलप क्षेत्र से संचालित “दिव्य दरबार झलप” नामक एक धार्मिक-आध्यात्मिक चैनल इन दिनों चर्चा में है। इस चैनल के माध्यम से स्वयं को दरबार पीठाधीश – काली पुत्र काली शरण जी महाराज बताया गया है, जिनके द्वारा माँ भगवती सिद्ध दिव्य दरबार से जुड़ने और तंत्र-मंत्र से जुड़ी समस्याओं के समाधान के दावे किए जा रहे हैं।

चैनल के विवरण में यह उल्लेख है कि तंत्र-मंत्र से बिगड़े कार्यों को “पूरी गारंटी” के साथ ठीक करने का दावा किया जाता है और हर प्रकार की व्यक्तिगत, पारिवारिक अथवा अन्य परेशानियों के समाधान का भरोसा दिलाया जाता है। साथ ही, संपर्क नंबर साझा कर आमजन से सीधे संपर्क करने की अपील भी की गई है।

यह संपादकीय किसी व्यक्ति, संस्था या धार्मिक आस्था का समर्थन या विरोध करने के उद्देश्य से नहीं लिखा गया है। लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक और मीडिया मंच होने के नाते यह आवश्यक हो जाता है कि ऐसे सार्वजनिक दावों को सावधानी और विवेक के साथ देखा जाए।

धार्मिक आस्था प्रत्येक व्यक्ति का निजी विषय है, किंतु जब किसी मंच पर निश्चित समाधान, पूरी गारंटी और तंत्र-मंत्र से हर समस्या के अंत जैसे दावे सार्वजनिक रूप से किए जाते हैं, तो यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि—

क्या ऐसे दावों का कोई वैधानिक या वैज्ञानिक आधार है?

क्या आमजन को मानसिक, आर्थिक या भावनात्मक रूप से प्रभावित होने से बचाने के लिए पर्याप्त पारदर्शिता बरती जा रही है?

कानून और समाज दोनों ही यह अपेक्षा करते हैं कि किसी भी प्रकार की सेवा या समाधान के दावे भ्रामक न हों और लोगों की मजबूरी, दुख या आस्था का अनुचित लाभ न उठाया जाए।

Durgtimes का उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, संतुलन और जिम्मेदार सोच को बढ़ावा देना है। आम नागरिकों से अपील है कि वे किसी भी प्रकार के दावे पर विश्वास करने से पहले तथ्यों, विवेक और कानूनी पहलुओं पर अवश्य विचार करें।

आस्था सम्मान के योग्य है, लेकिन विवेक उससे भी अधिक आवश्यक।

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